भारतीय शिक्षा प्रणाली व छात्रों का आत्मघात शोषण: प्रो. नीलम महाजन सिंह

(जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय व जस्टिस तेजस कारिआ) 

भारतीय शिक्षा प्रणाली व छात्रों का आत्मघात शोषण  

प्रो. नीलम महाजन सिंह 

मैं यह लेख, भारत की असक्षम शिक्षा नीति को लेकर गहरे दु:ख, अफ़सोस व रोष से लिख रही हूँ। हर चमकने वाली चीज़ सोना नहीं होती। मैं यह कह सकती हूँ कि 1990 के दशक में शिक्षा व शिक्षकों की गुणवत्ता आज की तुलना में कहीं बेहतर थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से एम.फिल व एम.ए. (इतिहास - राजनीतिक विचार) करने के बाद, मुझे साउथ दिल्ली कैंपस में 'लेक्चरर' के तौर पर नियुक्त किया गया। मेरे छात्र भी मेरी तरह ही युवा ही थे। मैं अपने छात्रों को मित्र बना लेती थी और उन्हें अनोखे तरीकों से पढ़ाती थी! आज भी मुझे छात्र बहुत पसंद हैं व ज़रूरत पड़ने पर मैं उनकी मदद के लिए हर संभव कोशिश करती हूँ। मुझे चार साल पहले, नई दिल्ली के राजिंदर नगर में 'राव स्टडी सर्कल में बच्चों की मौत की भयानक घटना' याद आती है। अचानक हुई बारिश से इलाके में पानी भर गया था व कई छात्र पानी में डूबकर मर गए थे। 7 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के साउथ-वेस्ट दिल्ली में सत्य निकेतन में हुई घटना ने मुझे स्तब्ध कर दिया है। भारत की शिक्षा नीति 'व्यक्तिपरक, भेदभावपूर्ण, जातिवादी और छात्रों के लिए मौत का फरमान' है। हाल ही में 'नी.ट.' (NEET) परीक्षा का पेपर लीक होना, बार-बार होने वाली बेतुकी घटना थी, जिसके कारण पूरे देश में अनेक छात्रों ने आत्महत्या की। मैं 35 साल से पत्रकार हूँ। लेकिन एक पत्रकार शिक्षक भी होता है, जो पाठकों तक सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्रों की जानकारी अर्जित करता है। परीक्षा को लेकर होने वाली घोर बेचैनी व अनिश्चितता; छात्रों की काबिलियत को पूरी तरह जाग्रत नहीं होने देती है। मैंने भारत की शिक्षा प्रणाली का गहराई से अध्ययन किया है। जब अर्जुन सिंह, मानव संसाधन विकास मंत्री थे, तो मैं शिक्षा सुधारों पर बनी सलाहकार समिति का हिस्सा थी। बेशक, शिक्षा नीति के राजनीतिकरण का सबसे बुरा दौर तब आया जब एक टीवी सीरियल की पूर्व अभिनेत्री ने शिक्षा व्यवस्था का बेड़ागर्क कर दिया। ज़ाहिर है, वह खुद कम पढ़ी-लिखी थीं और उसे शिक्षा नीति का ज्ञान नहीं था। मुरली मनोहर जोशी ने भारतीय शिक्षा व्यावसथा का राजनीतिकरण के ज़रिए शिक्षा नीति को अस्तव्यस्त करने की कोशिश की। इतिहास ने उन्हें एक असभ्य और ढोंगी राजनेता के तौर पर भुला दिया है। तो अब हम क्या करें? हमारे बच्चे बिना किसी दिशा के भटक रहे हैं। हर छात्र से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह बड़ा विद्वान बने। इसलिए, कपिल सिब्बल का 'स्कूल बैग का बोझ कम करने' पर ज़ोर देना एक नया विचार था। एच.आर.डी. मंत्री, वरिष्ठ वकील व राज्यसभा सांसद के तौर पर कपिल सिब्बल सुधारवादी सोच के व्यक्ति थे। 'राव स्टडी सर्कल में छात्रों की मौत' के बाद, दिल्ली नगर निगम की पोल खुल गई और यह साबित हो गया कि एम.सी.डी. सबसे भ्रष्ट और अक्षम संस्थाओं में से एक है। ज़्यादातर शहरों में नगर पालिकाएँ भ्रष्ट ही होती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के ज़रिए, अधिकारियों से लोगों की जान बचाने के लिए बचाव कार्यों में प्रयासों को दोगुना करने को कहा गया। इस मामले में केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस व एम.सी.डी. का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए गये थे। अब सत्य निकेतन की दु:खद घटना ने दिल्ली हाईकोर्ट को राजधानी में 'पेइंग गेस्ट हाउस' में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता ज़ाहिर करने पर मज़बूर कर दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को आदेश दिया कि वह एक हफ़्ते के अंदर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी हॉस्टलों की जांच करे व नगर निगम के नियमों का उल्लंघन करने पर उनके ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई करे। एक रविवार को, जब 17 से 22 की उम्र के हमारे बच्चे अपने कमरों में आराम कर रहे थे, तो यह जर्जर इमारत, ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जिससे कई लोगों की मौत हो गई व कई गंभीर रूप से घायल हो गए। टीवी चैनल '24×7 ब्रेकिंग न्यूज़' दिखा रहे थे। मेरे जैसे भावनात्मक लोग; मृतक छात्रों के माता-पिता के लिए व उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे थे। आंसू बहते रहे व मन में उदासी छा गई। क्या छात्रों को अपने शहर छोड़कर 'दिल्ली के एजुकेशन बाज़ार' की और भागना चाहिए, जहाँ सिर्फ़ बैचलर या पोस्ट-ग्रेजुएशन की डिग्री पाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं? नहीं। दिल्ली पुलिस ने अपनी ताज़ा जानकारी में बताया कि सत्य निकेतन में गिरी पाँच मंज़िला इमारत के मलबे से कुल 12 लोगों को बचाया गया है और मरने वालों की संख्या 12 हो गई है। यह आदेश दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों के छात्रों वाली इमारत के ढहने के बाद दिया गया। दिल्ली के ज़्यादातर लोगों ने बिना कमर्शियल टैक्स दिए अपने घरों को पी.जी. में बदलते देते हैं। इन कॉलोनियों में राजिंदर नगर, पटेल नगर, मुखर्जी नगर, कमला नगर आदि शामिल हैं। गिरी हुई इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता (81 साल), उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता (75 साल) और उनके बेटे महेश गुप्ता (52 साल) को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वे कुछ महीने जेल में रहेंगा और फिर ज़मानत पर बाहर आ जाएंगा। हरिराम, भारतीय वायु सेना से रिटायर्ड सार्जेंट हैं। महेश गुप्ता गुरुग्राम में हार्डवेयर की दुकान चलाता हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सत्य निकेतन इमारत गिरने के मामले में ज़िम्मेदारी से बचने के लिए, भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है और कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सवाल पूछने वालों को "दिमागी नक्सल" व "नाराज़ फूफा" जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। जब दिल्ली में "ट्रिपल-इंजन" सरकार है, तो नरेंद्र मोदी सरकार बेबस क्यों है? न तो कोई जवाबदेही है और न ही कोई विकल्प? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक अक्सर (TINA) 'टीना फ़ैक्टर — यानी "कोई विकल्प नहीं" (There Is No Alternative) — का तर्क देते हैं कि पीएम मोदी ही भारत के लिए एकमात्र सक्षम और अपरिहार्य नेता हैं का गायन करते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. योगेश सिंह ने बहुमंजिला पेइंग गेस्ट (PG) आवास के ढहने के बाद कॉलेज प्रिंसिपलों से छात्रों के लिए आवासीय सुविधाओं की समीक्षा करने और चल रहे हॉस्टल प्रोजेक्ट्स में तेज़ी लाने का आग्रह किया है। आम आदमी पार्टी ने आज कहा कि इस इलाके में कई BJP नेताओं की प्रॉपर्टीज़ हैं, जिससे कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने की वजह पता चलती है। AAP के सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कई BJP नेताओं की PG प्रॉपर्टीज़ हैं, जिससे इस इलाके में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ल, की निष्क्रियता का पता चलता है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि दिल्ली में सभी 5-मंजिला इमारतों को तुरंत सील कर दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह बात सामने आई है कि कई बीजेपी नेताओं की पीजी के तौर पर प्रॉपर्टीज़ हैं; और एम.सी.डी. कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। दिल्ली नई 'PG पी.जी. सुरक्षा नीति -1993' की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार एक नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत पुरानी इमारतों के मालिकों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा, इससे पहले कि उनका इस्तेमाल पेइंग गेस्ट रखने या नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठानों के तौर पर किया जा सके। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग के लिए नई योजनाएं, सर्वे, कमेटियां और प्रस्ताव शून्य हैं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने आज सत्य निकेतन इमारत हादसे को लेकर केंद्र और दिल्ली में BJP के नेतृत्व वाली सरकारों पर हमला बोला और राष्ट्रीय राजधानी में रोज़मर्रा के कामकाज के "पूर्ण रुप से ठप" होने का आरोप लगाया है। सागरिका ने कहा, "जानलेवा आग, सड़कों पर पानी भरना, महिलाओं के खिलाफ रोज़ाना जघन्य अपराध। अब, कॉलेज हॉस्टल की इमारत का चौंकाने वाला ढहना, जिसमें दुखद रूप से युवा छात्रों की जान चली गई और अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।" कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "पी.आर. का गुब्बारा" फूट गया है व दिल्ली की "चार इंजन वाली सरकार" को छात्रों की जान लेने वाली "किलिंग मशीन" करार दिया। यह लेखिका, ने सरकार से मांग की है कि जान गंवाने वालों के परिवारों को ₹2 करोड़ व घायलों को ₹50 लाख का मुआवज़ा दिया जाए। सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद, साउथ ज़ोन के प्रमुख MCD अधिकारियों - डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सीनियर इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल और असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान - को सस्पेंड कर दिया गया है। यह आदेश सोमवार को MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने जारी किया। दिल्ली हाई कोर्ट में इमारत गिरने की घटना पर नई पीआईएल (PIL) पर सुनवाई करते हुए, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से जुड़ी, MCD ने सत्य निकेतन में 'जर्जर' इमारत को गिराने का आदेश दिया है। इमारत गिरने से हुई मौतों के बाद, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के "जर्जर और खतरनाक हालत" में पाए जाने पर, एमसीडी ने उसके मालिक को ढांचा गिराने के लिए तीन दिन का समय दिया है। यह नोटिस MCD के साउथ ज़ोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग)-I द्वारा दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 491 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 348 के तहत जारी किया गया था। आदेश में MCD ने कहा, "अगर मालिक या कब्ज़ा करने वाला व्यक्ति आदेश मिलने के तीन दिन के भीतर ऐसा करने में विफल रहता है, तो वह इमारत को गिरा देगी और मालिक से इसका खर्च टैक्स की बकाया राशि के तौर पर वसूलेगी।" सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने हाउसिंग संकट से जूझ रहे छात्र हब की सच्चाई उजागर कर दी है। सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना ने छात्रों के इस इलाके में रहने की जगह की कमी की समस्या को उजागर किया है। साउथ कैंपस के आस-पास के सात कॉलेजों - श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, मैत्री कॉलेज, एआरएसडी कॉलेज, राम लाल आनंद कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और आर्यभट्ट कॉलेज - में से केवल दो में ही हॉस्टल की सुविधा है। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में लगभग 175 हॉस्टल सीटें हैं, जबकि मैत्री कॉलेज में केवल 27 सीटें हैं, जिसके कारण कई छात्रों को आस-पास के इलाकों में प्राइवेट पेइंग गेस्ट (PG) आवासों पर निर्भर रहना पड़ता है। कॉलोनी के ज़्यादातर मूल निवासी यहाँ से चले गए हैं और उनकी जगह 'माचिस के डिब्बे जितने छोटे अपार्टमेंट्स ने ले ली है जिन्हें पी.जी. में बदल दिया गया है', जो नागरिक नियमों का पालन नहीं करते हैं। इमारत गिरने की घटना के बाद, नागरिक अधिकारियों ने एक प्रवर्तन अभियान के तहत पूरे इलाके से पेइँग गेस्ट के साइनबोर्ड हटा दिए हैं। मेरी मांग है कि दिल्ली सरकार ज़ोनल कमिश्नरों व मजिस्ट्रेटों के माध्यम से दिल्ली में पी.जी. का गहन ऑडिट करे। दिल्ली पुलिस को इन पी.जी. के लिए सुरक्षा योजना बनानी चाहिए। इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और सुरक्षा नियमों की निगरानी दिल्ली फायर लाइसेंस विभाग द्वारा की जानी चाहिए। प्रत्येक छात्र के लिए बाथरूम व पेंट्री के साथ, कम से कम 10x10 फीट का क्षेत्र अनिवार्य होना चाहिए। इसके अलावा, 'टिफिन व भोजन आपूर्ति माफिया' को नियंत्रित किया जाना चाहिए। किसी भी प्रॉपर्टी मालिक को प्रति बेड, ₹8,000 प्रति माह से अधिक शुल्क लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। प्रॉपर्टी मालिकों द्वारा सिक्योरिटी डिपॉजिट तुरंत वापस की जानी चाहिए। हर कमरे में वेंटिलेशन के साथ-साथ अग्निशामक यंत्र (fire extinguisher) उपलब्ध कराया जाना चाहिए। बेसमेंट में लोगों के रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पी.जी. चलाने के लिए लाइसेंस प्राप्त किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने राव स्टडी सर्कल त्रासदी मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की थी, जब तक कि सब कुछ लागू नहीं हो गया (जस्टिस मनमोहन दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे)। अब जस्टिस उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया को दिल्ली सरकार की नीति की व्यक्तिगत रूप से, समयबद्ध तरीके से निगरानी करनी चाहिए। हे मेरे बच्चों (छात्रों), मैं तुम्हें सशक्त बनाने के लिए क्या करूँ? ये छात्र हमारे देश का भविष्य हैं। पीएम नरेंद्र मोदी, मैं आपसे अपील करती हूँ कि आप शिक्षा नीति के कड़े कानून बनाएं, जो हमारे प्यारे छात्रों की मानसिक, शारीरिक और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करें।
प्रो. नीलम महाजन सिंह 
प्रो. नीलम महाजन सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार, दूरदर्शन समाचार व्यक्तित्व, सॉलिसिटर मानवाधिकार संरक्षण , शिक्षाविद् व परोपकारक)

singhnofficial@gmail.com

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