वोटर लिस्ट अवलंबन, बौद्धिक बहस व सरकार संग वार्तालाप: प्रो. नीलम महाजन सिंह

वोटर लिस्ट अवलंबन, बौद्धिक बहस व सरकार संग वार्तालाप 

प्रो. नीलम महाजन सिंह

दिल्ली को भारतीय संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों ने नहीं, बल्कि अराजकता-वादी, नकली पत्रकार, राजनीतिक वकील, एस.एफ.आई. जे.एन.यू. यूनिट, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी - लेनिनवादी) - लिबरेशन (CPI-ML), कांग्रेस, इं.डि.या. गठबंधन (I.N.D.I.A.) ने बंधक बना कर रखा हुआ है। लोकतंत्र अब 'मॉबोक्रेसी' (भीड़तंत्र) में बदल गया है। बेशक, एस.आई.आर. कथित तौर पर 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाना, एक गंभीर मुद्दा है, जिसे सही मंच पर उठाया जाना चाहिए। इंडियन नेशनल कांग्रेस, यू.पी.ए. व कम्युनिस्ट, जो कभी कॉकरोच, छिपकली, चींटी व बिच्छू जैसे, अब 'लोकतांत्रिक आज़ादी के नाम पर कृंतक' (कुतरने वाले जीव) बन गए हैं। टैक्स देने वालों का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की रैपिड एक्शन फोर्स व नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स (NSG) काम पर लगीं हैं। 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' का बदसूरत चेहरा, अब नए बने 'प्रेस्टिट्यूट्स' (बिकाऊ पत्रकारों) का पसंदीदा शौक बन गया है! इस तथाकथित आंदोलन, क्रांति और बगावत ने दिल्ली के आम आदमी की रोज़मर्रा ज़िंदगी को बर्बाद कर दिया है। 
विपक्ष की भूमिका बहुत दयनीय है, जैसे कोई जंगली लोमड़ी हो! 'जेन-ज़ी' (Gen-Z) का बदसूरत चेहरा सामने आ रहा है। सार्वजनिक बातचीत का स्तर गिर गया है, जिसे कई टी.वी. चैनलों पर सुना जा सकता है। नई दिल्ली में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) व भारतीय निर्वाचन आयोग पर गड़बड़ी के आरोपों को लेकर बड़े राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। गृह मंत्रालय ने 12.10.2026 को एक नोटिफिकेशन जारी कर, जंतर-मंतर को 'विरोध-प्रदर्शन स्थल' के तौर पर रद्द कर दिया है। इसकी जगह, किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी और शाहदरा को तय किया गया है। (I.N.D.I.A.) ईं.डि.या. ब्लॉक के विपक्षी नेताओं ने कनॉट प्लेस व कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया से भारत के सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े व चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज ने अलग-अलग प्रदर्शनों का नेतृत्व किया व उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसी तरह, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी /CPI-M) की केंद्रीय समिति के सदस्यों ने भी विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। जॉन ब्रिटास (John Brittas, M.P.) और अन्य कम्युनिस्ट नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका, सौरव दास व अभिजीत दिपके के साथ इंडियन यूथ कांग्रेस, ऐआईसा (AISA), (NSUI) एन.एस.यू.आई. ने मंडी हाउस व इंडिया गेट के पास लगातार विरोध-प्रदर्शन किए। दिल्ली पुलिस ने कई दिनों से चल रहे, इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान 20 से ज़्यादा एफ.आई.आर. दर्ज कीं और 1,500 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर, बाद में छोड़ दिया। अधिकारियों ने आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगाई हैं और जंतर-मंतर जैसी पारंपरिक विरोध-प्रदर्शन वाली जगहों को डी-नोटिफ़ाई कर दिया है।
मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद करने और ट्रैफ़िक डायवर्जन के बीच विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगहें तय की गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और भारतीय सुप्रीम कोर्ट में 'शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने' के अधिकार, पुलिस द्वारा हिरासत में लेने और नए विरोध प्रदर्शन की इजाज़त मांगने से जुड़ी कई याचिकाएँ दाखिल हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की है। सवाल यह उठता है कि मोदी सरकार विरोध प्रदर्शन से प्रभावित क्यों है? CPI(M) सीपीआई ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' के ख़िलाफ़ अपना संघर्ष और तेज़ करने का संकल्प लिया है। सी.ई.सी. ज्ञानेश कुमार के बर्ताव व विवादित प्रक्रिया को लेकर नाराज़गी कम नहीं हो रही है, व दुनिया भर की मीडिया ने, बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन को दर्शाया है। विरोध प्रदर्शनों पर सुरक्षा के कड़े कदमों के बाद, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को गैर-कानूनी हिरासत रोकने, सामान्य सार्वजनिक परिवहन व इंटरनेट सेवाएँ बहाल करने का आदेश दिया है। दिल्ली पुलिस ने लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी, क्योंकि आयोजकों ने ज़रूरी 10 दिन के बजाय सिर्फ़ 3 दिन पहले ही इजाज़त के लिए आवेदन किया था, व शहर के कुछ हिस्सों में (BNNS) बी.एन.एन.एस. की धारा 163 के तहत 'निषेधाज्ञा' लागू कर दी गई थी। अधिकारियों ने हज़ारों पुलिस व पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया, मेट्रो के कई स्टेशन बंद कर दिए, सेंट्रल दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी व सड़कों पर आवाजाही पर पाबंदियाँ लगा दीं। रविवार, 11.10.2026 को हुई सुनवाई में, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण व बिना हथियार वाले प्रदर्शनकारियों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में न लिया जाए। कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (D.M.R.C.) व रेल अधिकारियों को सामान्य कामकाज फिर से शुरू करने का आदेश दिया। 
इस संदर्भ में, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में, दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल व जामिया मिलिया इस्लामिया के वाइस-चांसलर, नजीब जंग, आई.ए.एस. ने कहा, "हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह वोटर लिस्ट (electoral rolls) में बदलाव की प्रक्रिया की समीक्षा करें, इसे रोकें और इसकी जांच करें, साथ ही ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त अपने (CEC) पद से इस्तीफा दें।" नजीब जंग ने कहा कि उन्होंने भारत के संविधान के प्रति शपथ ली है। किसी भी नागरिक को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। पूर्व गृह सचिव श्री पिल्लई, ने भी सरकार से सकारात्मक रुख अपनाने और वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया के तहत करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने में हुई गलतियों को सुधारने का आग्रह किया। वरिष्ठ वकील राणा राज के. सिंह ने कहा, "एक नागरिक और वकील के तौर पर, मैं सरकार से आग्रह करता हूँ कि वह असली मतदाताओं के नाम हटाने के फैसले की समीक्षा करे।" अनुराग कुमार, आई.पी.एस. दिल्ली पुलिस कमीश्नर ने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की निजी सुरक्षा, दिल्ली पुलिस की ज़िम्मेदारी है। गांधी परिवार से (SPG) एस.पी.जी. सुरक्षा हटा ली गई थी।इसलिए, 'सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति (protectee)' के लिए अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस का सहयोग करना जरूरी है। मीडिया कर्मियों व महिला पुलिस अधिकारियों के बीच झड़प, प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही बेहद तुच्छ भाषा, मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाकर इसे कथित 'क्रांति व सरकार के पतन' व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की ओर मोड़ दिया है। भारत की राजधानी होने के नाते, दिल्ली को कई वैश्विक खतरों का सामना करना पड़ता है, जिसे प्रदर्शनकारी नजर अन्दाज कर रहें हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मुद्दे को अराजकता और सड़क-प्रदर्शन करके हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए बौद्धिक बहस, मीडिया में प्रचार-प्रसार और मौजूदा सरकार के साथ सक्रिय वार्तालाप की ज़रूरत है।
प्रो. नीलम महाजन सिंह
(वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक, मानवाधिकार संरक्षण के लिए सॉलिसिटर व परोपकारक)

singhnofficial@gmail.com

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