Shakeel Hasan Shamsi writes on Neelam Mahajan Singh

An ode to #Neelam_Mahajan_Singh by #Shakeel_Hasan_Shamsi

Sr. Journalist, Author, Scholar & TV Personality
07.10.2021
https://twitter.com/neelamsinghLLB/status/1446095165953765382?s=20
🍁नीलम महाजन सिंह को मैं 1994 ई० से जानता हूँ। मैं उन दिनों दूरदर्शन के भोपाल केंद्र से ट्रांसफर हो कर दिल्ली दूरदर्शन के न्यूज़ रूम में, समाचार प्रस्तुतकर्ता की ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहा था और नीलम साहिबा उस समय संवाददाता और एंकर के रूप में कार्यरत थीं। यह उन दिनों की बात है जब तक कोई न्यूज़ चैनल नहीं शुरू हुआ था। टेलीविज़न की तरंगों पर उन दिनों में दूरदर्शन वालों का एक मात्र राज था।  राजनीतिज्ञ और बड़े-बड़े सरकारी अफ़सर दूरदर्शन वालों की बहुत ख़ातिर दारी करते थे। उस समय जिस समारोह में दूरदर्शन का कैमरा पहुँच जाता था, वह उस समारोह के भव्य होने की दलील बन जाता था। उस समय तक दूरदर्शन का गोल्डन पीरियड चल रहा था, इस लिए दूरदर्शन के संवाददाता या एंकर की बहुत अहमियत थी। यहां तककि समाचार बुलेटिन समाप्त होने के बाद समाचार सम्पादक, प्रस्तुतकर्ता और तकनीकी निर्देशक के जो नाम स्क्रोल होते थे जिसकी वजह से लोग बुलेटिन तैयार करने वाले लोगों से भी परिचित थे।
ऐसे सुनहरी दौर में एक सुंदर सी लड़की, फर्राटेदार अंग्रेजी और हिंदी में किसी बड़े आयोजन की रिपोर्टिंग करे, तो अपने आप ही उसकी पहचान बन जानी स्वाभाविक था। नीलम महाजन सिंह ने वैसे तो पत्रकारिता की दुनिया में, पहले से ही एक जाना पहचाना नाम थीं, मगर दूरदर्शन में आने के बाद उन्होंने अपनी एक अलग सी छवि बनाई और खुद को केवल संवाददाता के रूप में ही नहीं एक अच्छे एंकर और प्रस्तुतकर्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।
उस ज़माने में वह दूरदर्शन के उन गिने-चुने लोगों में शुमार होती थीं जिनको टीवी के प्रोडक्शन की तकनिक भलीभांति मालूम थी। उस समय समाचार बुलेटिन में  चूँकि सिर्फ समाचार ही होते थे और आज का जैसा हू-हल्ला नहीं था इस लिए एक संवाददाता या एंकर में जो गरिमा होनी  चाहिए थी वह नीलम में भली प्रकार थी । हमारी उन दिनों में नीलम जी से अच्छी जान पहचान थी मगर इत्तेफ़ाक़ की बात यह कि हम दोनों ने कभी एक साथ कोई  प्रोग्राम तैयार नहीं किया।

   Shakeel Hasan Shamsi Saheb 

जब मैं ने 2005 में दूरदर्शन से वी.आर. एस. (स्वेच्छा से सेवा मुक्ति) लिया तो  फिर दूरदर्शन के सभी  मित्रों से संबंध कम हो गए। समय का चक्र इतनी तेज़ी से चला कि मैं दूरदर्शन से लोक सभा टीवी पहुंचा। वहां से सहारा में और फिर जागरण ग्रुप के उर्दू अख़बार इन्क़िलाब का सम्पादक बना। 16 वर्ष से अधिक इतने वर्ष बीत जाने के बाद अचनाक एक बार फिर नीलम महाजन सिंह से मुलाक़ात हुई। तब तक वह भी दूरदर्शन को बाय-बाय कह चुकी थीं। इस बार  उनसे ज़्यादा गहरी आत्मीय मुलाक़ात हुई। इस बार उनके बारे में बहुत सी बातें मालूम हुईं। मालूम हुआ कि वह 'कश्मीर की  बेटी' और 'पंजाब की बहु' और दिल्ली की सहेली हैं। दिल्ली को उन्होंने अपने कर्म भूमि इस तरह बनाया कि वह पत्रकारिता के साथ अधिवक्ता भी बनीं,  और मानवाधिकारों के लिए लड़ने वालों के पंक्ति में खड़ी नज़र आईं। मुझ से मिलने के बाद उन्होंने दैनिक इन्क़िलाब में लिखना शुरू किया और उर्दू के पाठकों ने भी उनके आलेख पसंद किये। उनकी लेखनी में झुझारू पन हैं उनके आर्टिकल्स में नया पन है, क्योंकि वह वही बात कहती हैं जो उनके मन में होती है । वह पाठकों को खुश रखने की कोशिश नहीं करतीं बल्कि उनको विषय के विभिन्न आयामों से परिचित करवाती हैं।

उनका यही रवैया अब उनकी नई पुस्तकों; 'ओशन आफ लव' व 'तांडव' में भी नज़र आ रहा है। मुझे उम्मीद है कि अब नीलम अपने व्यक्तित्व में एक नया शब्द जोड़ेंगी और अब उनकी पहचान एक प्रतिभावान लेखिका के रूप में स्थापित होंगी । भविष्य में भी नीलम की लेखनी जन-मानस की प्रखर आवाज बन कर सुनाई देती रहेगी।
~शकील हसन शमसी~
( वरिष्ठ पत्रकार, अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक, पूर्व सम्पादक इन्क़िलाब, रेज़िडेंट एडिटर रोज़नामा सहारा, कंसल्टेंट प्रोड्यूसर लोक सभा टीवी समाचार प्रस्तुतकर्ता दूरदर्शन, कमेंट्री राईटर फिल्म्स डिवीज़न ऑफ इण्डिया)

     नीलम महाजन सिंह: जीवन यात्रा 

Comments